चंडीगढ़ सीनियर डिप्टी मेयर का पद भी बीजेपी का; डिप्टी मेयर पद पर भी कब्जा, AAP-CONG गठबंधन टूटने से सीधा फायदा पहुंचा
Chandigarh Senior Deputy Mayor And Deputy Mayor Result News Update
Chandigarh Mayor Election Result: चंडीगढ़ मेयर पद पर कब्जा जमाने के बाद बीजेपी ने सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पद पर भी जीत हासिल की है। बीजेपी के वार्ड नंबर-32 से पार्षद जसमनप्रीत सिंह चंडीगढ़ के नए सीनियर डिप्टी मेयर बने हैं। जसमनप्रीत सिंह के प्रतिद्वंदी के रूप में कांग्रेस ने सचिन गालव और आम आदमी पार्टी ने मुन्नवर खान को उम्मीदवार बनाया था। इसके अलावा वार्ड नंबर-4 से पार्षद और बीजेपी उम्मीदवार सुमन देवी चंडीगढ़ की नई डिप्टी मेयर बन गई है। इस पद के लिए कांग्रेस से निर्मला देवी और आम आदमी पार्टी से जसविंदर कौर मैदान में थीं।
बता दें कि कांग्रेस ने केवल मेयर चुनाव के लिए वोटिंग की। इसके बाद सांसद मनीष तिवारी और पार्टी के सभी पार्षद नगर निगम के असेंबली हॉल से उठकर बाहर चले गए। कांग्रेस ने सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में हिस्सा नहीं लिया। वहीं आंकड़ों के हिसाब से बीजेपी वोटों में भारी पड़ी और दोनों पदों पर जीत दर्ज की। मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद जीतने के बाद बीजेपी खेमे में भारी जश्न का माहौल देखा जा रहा है। ज्ञात रहे कि इससे पहले ये दोनों ही पद कांग्रेस के पास थे। लेकिन इस बार कांग्रेस के हाथ पूरी तरह से खाली रहे। साथ ही आम आदमी पार्टी को इस बार भी कुछ हासिल नहीं हुआ।
हाथ उठाकर करवाई गई वोटिंग
बता दें कि गुरुवार सुबह 11 बजे सबसे पहले मेयर पद के लिए वोटिंग कराई गई। चंडीगढ़ मेयर चुनाव के इतिहास में इस बार पहली बार हाथ उठाकर वोटिंग करवाई गई। चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा नियुक्त पीठासीन अधिकारी डॉ. रमणीक सिंह बेदी की मौजूदगी में मेयर चुनाव संपन्न हुआ। वहीं नए मेयर की घोषणा होने के बाद सीनियर डिप्टी मेयर और फिर डिप्टी मेयर का चुनाव कराया गया। इन दोनों पदों के लिए चुनाव प्रक्रिया नवनिर्वाचित मेयर सौरभ जोशी की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
बीजेपी की जीत तय मानी जा रही थी
बता दें कि पहले ही आंकड़ों के हिसाब से बीजेपी की जीत तय मानी जा रही थी। नंबर गेम में बीजेपी का पलड़ा सबसे भारी था। दरअसल इस बार मेयर चुनाव में बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी तीनों के बीच मुक़ाबला था। जहां इस त्रिकोणीय मुक़ाबले में संख्या बल के लिहाज से बीजेपी सीधे तौर पर सबसे मजबूत स्थिति में रही। बीजेपी की यह मजबूती और उसकी यह ताकत तब और बढ़ गई, जब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने गठबंधन से किनारा करके अकेले-अकेले लड़ने का फैसला लिया। संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस और आप दोनों ही पार्टियों के पास वोट बहुत कम थे।
ऐन मौके पर गठबंधन की अटकलें थीं
हाल ही में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का गठबंधन टूट गया था लेकिन इसके बावजूद इसके कई राजनीतिक मायने निकालते हुए अटकलें थीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों के ऐन मौके पर साथ आ सकते हैं और ऐसे में चुनाव नतीजे की तस्वीर बदलती हुई दिख सकती है। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। कांग्रेस ने मेयर चुनाव अकेले लड़ा और इसके बाद सांसद मनीष तिवारी और पार्टी के सभी पार्षद नगर निगम के असेंबली हॉल से उठकर बाहर चले गए। कांग्रेस ने सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में हिस्सा नहीं लिया।
गठबंधन न होने से बीजेपी को सीधा फायदा पहुंचा
बता दें कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का गठबंधन जहां बीजेपी को कांटे की टक्कर दे सकता था, गठबंधन न होना बीजेपी के लिए यह सीधा फायदा रहा। मसलन दोनों दलों के साथ आने की स्थिति में मुकाबला 18-18 की बराबरी पर पहुंच जाता। ऐसे में भाजपा को जीत के लिए यह कोशिश करनी पड़ती कम से कम एक पार्षद को अपने पाले में कर बढ़त पक्की की जाए। फिलहाल बीजेपी के लिए राह आसान रही और चंडीगढ़ में एक बार फिर बीजेपी का मेयर बन गया। बीजेपी ने पहले ही दावा किया था कि मेयर पद पर उसका कब्जा बरकरार रहेगा।
पार्षदों के वोटों का पूरा गणित समझिए
बता दें कि चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए नगर निगम सदन में कुल 36 वोट हैं, जिनमें 35 पार्षदों और एक सांसद का वोट शामिल है। मेयर पद जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 19 वोटों की आवश्यकता होती है। गौरतलब है कि हाल ही में आम आदमी पार्टी से 2 महिला पार्षदों के बीजेपी में आने से बीजेपी के पार्षदों की संख्या अभी 18 है। पहले पार्टी के पास पार्षदों की संख्या 16 थी। वहीं आम आदमी पार्टी से 2 पार्षदों के टूटने के बाद इस समय AAP के पास पार्षदों की संख्या 11 रह गई है। वहीं कांग्रेस के पास कुल पार्षदों की संख्या इस समय 6 है। साथ ही कांग्रेस के पास एक वोट चंडीगढ़ के वर्तमान सांसद मनीष तिवारी का भी है। यानि कांग्रेस के पास अभी कुल 7 वोट हैं।
चंडीगढ़ मेयर चुनाव के बारे में
मालूम रहे कि, चंडीगढ़ में मेयर का कार्यकाल केवल एक साल का होता है। हर साल मेयर पद के लिए वोटिंग कराई जाती है और शहर को नया मेयर मिलता है। इस चुनाव में जनता वोट नहीं करती है। जनता द्वारा चुने हुए पार्षद इस चुनाव में वोट डालते हैं। ज्ञात रहे कि चंडीगढ़ में कुल 35 वार्ड हैं। यानि इन वार्डों के कुल 35 पार्षद हो गए। ये 35 पार्षद ही मेयर चुनाव में वोट करेंगे। मेयर चुनाव में मौजूदा सांसद का वोट भी पड़ता है। इस समय बीजेपी के पास अपना सांसद नहीं है। जबकि कांग्रेस के पास सांसद के वोट की ताकत है। इससे पहले जब किरण खेर चंडीगढ़ की सांसद थीं तो वह बीजेपी के लिए वोट करती थीं।
पिछले चुनाव में BJP ने मेयर बनाया
चंडीगढ़ में पिछला मेयर चुनाव 30 जनवरी को हुआ था। जिसमें कम नंबर होने के बावजूद बीजेपी अपना मेयर बनाने में कामयाब रही थी और हरप्रीत कौर बबला मेयर बनी थीं। दरअसल क्रॉस वोटिंग से बीजेपी को जीत मिली थी। हालांकि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का पद बीजेपी के पास नहीं आया था। AAP गठबंधन के साथ इन दोनों पद पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस से जसबीर सिंह बंटी सीनियर डिप्टी मेयर और तरुणा मेहता डिप्टी मेयर बनी थीं।